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ब्रह्मज्ञान एवं निर्गुण की सूची

1- अब तो सोच समझ कै चाल.....

दोहा –
चार बेद छः शास्त्र में, कुल बात लिखी हैं दोय ।
क्या तो मुख से हरिभजन, क्या धर्म हाथ से होय ॥


अब तो सोच समझ कै चाल
गलती में जो कुछ बनी सो बनी ॥ टेक ।

चोरी जारी बदमाशी की कहीं नहीं चटसाल
बिना पढ़ाये आपै सारी पढ़ ग...

2- भतेरा सो लिया रे अब....

भतेरा सो लिया रे अब तो जाग मुसाफिर जाग ॥ टेक ।

पहले तो माता के गर्भ में सोया नो दस मास
जाग्या नहीं जगावनिया कोई था ना तेरै पास 1॥

फिर सोया माता की गोद में कभी बगल के मांह
कभी पालने कभी छाती पै जद भी जाग्या नांह 2॥

फिर सो...

3- अबतो जाग मुसाफिर जाग.....

अबतो जाग मुसाफिर जाग
बहतेरे दिन सो लिया रे ॥ टेक ।


क्या सोवै सुख नींद मुसाफिर वन में लग रही आग
आला सूखा सब जलता आवै इस निद्रा कूं त्याग
सोया उन सब कुछ खो लिया रे 1॥

इस वन मे हैं चोर घनेरे तेरे धन पै साज रही लाग
जो कुछ त...

4- प्रभु जी थारी अलख अगोचर....

प्रभु जी थारी अलख अगोचर माया ॥ टेक ।

मकड़ी नै नाभि से सूत उगलकर जाल बनाया
थोड़ी देर में उल्टा ग्रस गई क्या उसके हाथ आया 1॥

बालक नै घर घुल्ला रच रच नया नया खेल रचाया.
खेल खेल करी खेल बिझानी रेत में रेत मिलाया 2॥

जल मे लहर ...

5- प्रभु जी थारी माया अगम....

प्रभु जी थारी माया अगम अपार ॥ टेक ।

धरती अंबर चाँद और सूरज रच दिये बेसुम्मार
अग्न पवन समंदर वन पर्वत रचे हजारों हजार 1॥

लख चौरासी जीवाजून रची अलग अलग व्यवहार
कीड़ी को कण हाथी को मण निस दिन देत आहार 2॥

पता ना चलता किस क...

6- ज्योतिस्वरूप तेरी दे रही....

ज्योतिस्वरूप तेरी दे रही जौत दिखाई ॥ टेक ।

तेजरूप है सूरज में चंदा में शीतलताई
चमत्कार दामिनी चमक में नभ में श्यामता छाई
ज्योति स्वरूप तेरी .... 1॥

दहन अगन में महक धरण में पवन में वेग हवाई
फूल में महक मिठास फलों में पत...

7- जिसका तेरै विश्वास है....

दोहा –
भाषा में पद रचत है, कविजन शंकरदास ।
फिर भी क्यूं मरत है, जहां कैलाशी का बास ॥

जिसका तेरै विश्वास है
खुद उसी को काल चरै है ॥ टेक ।

त्रिशक्ति ब्रह्मा वेद प्रचारी
लक्ष्मीयुक्त विष्णु अवतारी
पार्वती तत सु त...

8- मरा सो किसका यार है....

दोहा –
शंकरदास ने रच दिया, पद बुद्धि अनुसार ।
बिन मारे ही मर गए, हम उन मुर्दों के यार ॥


मरा सो किसका यार है
जीते जी की यारी है ॥ टेक ।

जीते जीव जन्म देह धारे
मरे सो गए दुनिया से प्यारे
जीते जी के बंधन सारे
जीते ...

9- जीव ब्रह्म तो एक है....

दोहा –
जीव ब्रह्म की एकता, कहत विषय जन बुद्ध ।
तिनको जे अंतर लहै, ते मतिमंद अबुद्ध ॥

जीव ब्रह्म तो एक है
इच्छा का नाम माया है ॥ टेक ।

जल में लहर लहर में जल है
जल लहरों का एक स्थल है
आद अंत में एक नक़ल है
बीच में शक्ल अन...

10- निराकार समाया है साकार....

निराकार समाया है साकार में जी ॥ टेक ।

जैसे अग्नि काठ में जम रहा
निराकार रूप में थम रहा
ऐसे ही परमेश्वर रम रहा
संसार में जी 1॥

जैसे दूध में घी समाया
निराकार रूप कहलाया
किया जतन वहीं प्रगटाया
अलख अगार में जी 2॥

...

11- निराकार बने साकार....

निराकार बने साकार
सोच समझ इस रीति से ॥ टेक ।


अंकुर ना बीज में दर्शे
आकार कहीं ना पर्शे
कुछ करना चाहिए विचार
विचार प्रतीति से 1॥

गन्ने में ना दीखै मिठाई
किया जतन वहीं प्रगटाई
तू मन का भ्रम बिसार
मान इस नीति से 2...

12- काया जिगर ब्रह्मंड का....

काया जिगर ब्रह्मंड का
बिन खोजीं खोज ना पावै ॥ टेक ।


काया में षटचक्र चलैं हैं
नो नाड़ी इस रीत हिलैं हैं
प्रचंड अग्नि तीन जलैं हैं
रस्ता मेरुदण्ड का
मुश्किल से हाथ आवै 1॥

पांच पौन काया में विरमते
अपनी हद पर जा जा थ...

13- निराकार जो वस्तु है साकार....

निराकार जो वस्तु है साकार हो जाती है ॥ टेक ।

निराकार तेल कहलाता
तिलों में कहीं नहीं दर्शाता
नर वो ही प्रगटाता
युक्ति जिसे आती है 1॥

निराकार आकार धारै
घर का घोर तिमर संघारै
आकार के सहारे
दीवा अग्न बाती है 2॥

ज...

14- सुरती ला ले ब्रह्म विचार में.....

सुरती ला ले ब्रह्म विचार में
इस रागद्वेष से हटकै ।।


जैसे एक वृक्ष के ऊपर दोय पक्षी करैं वास
एक बैठा फल खावै एक देखै आसपास
ऐसे देह बीच जीव ब्रह्म न्यू रहे हैं भास
ब्रह्मसत्ता है अचल
वाकी कोई ना शक्ल
कभी होती ना नकल <...

15- संबंध हुया स्थूल में....

संबंध हुया स्थूल में
कहो कैसे ब्रह्म माया का ।। टेक ।

ब्रह्म अखिल और माया न्यारी
कैसे भोगैगा संसारी
बिन भोगे नही दावादारी
इस मिट्टी के तूल में
पड़ै प्रतिबिंब छाया का 1।।

कैसे क्लीव बन रतिपति चीन्हा
बिन चीन्हे कैसे...

16- ये झगड़ा तेरै याद है....

ये झगड़ा तेरै याद है
या और भी कुछ जानै है ॥ टेक ।


गाने में तैं उमर गंवाई
शुद्धमति पर तुझे ना आई
जहां बैठा वहां करी लड़ाई
क्या तुझे आता स्वाद है
कहने से नहीं मानै है 1॥

बार बार समझा लिया तुझको
समझा नहीं फिकर है मुझको...

17- हिया के अंधे अबतो पलक....

हिया के अंधे अबतो पलक उघाड़ ॥ टेक ।

मृत्यु तीर सांध रहा तुजपै हूणी पीसै जाड़
अकाल तेरी श्वासा गिण रहा काल मूंह रहा पाड़
हिया के अंधे ... 1॥

हाथी पांच घेर रहे आगा मार रहे चिंघाड़
पीछा भी आ घिर गया तेरा शेर रहा है दहाड़
हिया क...

18- सैरा करनिया कौन है....

सैरा करनिया कौन है
मन डटा अटल बंगले में ।। टेक ।


मन और जीव संग रहे प्यारे
जहां जाय वहां संग पधारे
ये होते ना न्यारे न्यारे
न्यारा तो पंच पौन है
जो घूमै देह सगले में 1।।

मन सहचार जीव कहलाता
ये मकसद भागवत में गाता

19- जो वाकिफ़ हो उस हाल से....

जो वाकिफ़ हो उस हाल से
करो ब्रह्मज्ञान का गाना ॥ टेक ।


शब्द ब्रह्म किसको कहते हैं
क्या क्या लक्ष लक्षण गहते हैं
उडगण कहो कहां रहते हैं
गुप्त सुधा के ताल से
उस ताल का हाल सुनाना 1॥

क्या लक्षण हैं पंचीकरण के
सकल हा...

20- उस घर का तुझे नहीं बेरा....

उस घर का तुझे नहीं बेरा
जिस घर का तूं जिकर करै है ॥ टेक ।


पुत्र ना पुरुष खबर ना खोजन
अणी समान डगर का रोजन
विकट भौम का लाखों योजन
पड़ा है घोर अंधेरा
सायुज से बहोत परे है 1॥

उदय अस्त और कहीं दिवाकर
ना तारागण गिरे छिपा...

21- सातों से सुरती लगाय दे.....

सातों से सुरती लगाय दे
तिया तज चढ़ छक्के पर ॥ टेक ।


एका पकड़ ले तज दूवे को
दूवा सेती मार मूवे को
चोका क्या पाल सूवे को
पांचा खेल ठगाय दे
आते से नो के नक्के पर 1॥

बारह तेरह मिले आपस में
हुये पच्चीस जोड़ दे दस में
ग्या...

22- पवन रूप है जीव जीव का.....

पवन रूप है जीव जीव का पवन में वासा है ॥ टेक ।

काया में श्वासा चलैं श्वासा में चलै पौन
पौन नाम है जीव का उसी का आवागौन
कुदरती अजब तमाशा है 1॥

दीपक से दीपक जुप्या ज्योति वही अनंत
यही धरन है जगत की जीवों का नहीं अंत
कर्म ...

23- निराकार वही साकार है.....

निराकार वही साकार है
जल थल में पूर रह्या है ॥ टेक ।


अलख अगोचर अंतर्यामी
भेद दृष्ट सृष्ट के स्वामी
सर्वगुण सम्पन्न निष्कामी
भीतर वोही बाहार है
नीडै ना दूर रह्या है 1।।

लकड़ी में ना अग्नि भासै
मंथन किए से हुईं प्...

24- सर्वाधार सर्वव्यापक ईश्वर....

सर्वाधार सर्वव्यापक ईश्वर सर्वशक्तिमान है ॥ टेक ।

सर्वव्यापक की रीत निराली
उस बिन कोई ग्रह नही खाली
अवतार सिद्ध करने वाली
बस तेरी ही जबान है 1।।

जो शक्तियों का होय खजाना
तब हो नाम सर्वशक्तिमाना
सूक्ष्म स्थूल ...

25- ढूंढत ढूंढत उस देश कूं.....

ढूंढत ढूंढत उस देश कूं
थके छ: दस चार अठारा ॥ टेक ।


लख योजन तक ब्रह्मा ध्याया
देश विदेश नजर ना आया
नेती नेती शब्द सुनाया
पता ना मिला सुरेश कूं
मन हांड ढूंढ पचहारा 1॥

किरोड़ों जोजन विष्णु चढ़ गए
अरब खरब मंजलूं से बढ़ ...

26- था लोभी लोभ के कारणै....

था लोभी लोभ के कारणै
बणजी को चल्या एक बनिया ॥ टेक ।


सिर धर गठड़ी चल्या व्यापारी
आगै एक बण आ गया भारी
भूल्या पंथ हुई लाचारी
आगै सिंह ललकारणै
लग रह्या बन का विचरनिया 1॥

आगै हो कै भाग चल्या लाला
पीछै हाथी पांच मतवाल...

27- मिलै परमात्मा जी तुम....

मिलै परमात्मा जी तुम दावा मत नहीं छोड़ो ।।

शुद्ध रहो और शांति धारो प्रेम सभी से रखना
दयावंत सभ जीवों पर हो फेर प्रभु को लखना 1।।

पृथ्वी में महक श्यामता नभ में जल में शीतलताई
वायु में वेग तेज अग्नि में दे रह्या ईश्वर दिख...

28- हमको राम नाम अति....

हमको राम नाम अति प्यारा
जाकी महिमा अगम अपारा ॥ टेक ।


राम नाम की महिमा गा रहे छदश चार अठारा
चोदह सौ चवालीस नाम नै भवनिधि पार उतारा 1॥

पूरा नाम प्रह्लाद रटा और आधा गजराज उचारा
उल्टा बाल्मीक नै रटकर जीवन जन्म सुधारा 2॥ <...

29- तेरी मिटै सकल दुखदाई.....

तेरी मिटै सकल दुखदाई भज मन राम राम राम ॥ टेक ।

वो ही मच्छ वही कच्छ उसी ने सूकर देह बनाई
नरसिंह वो ही बना उसी नै देह वामनी पाई 1॥

परशुराम वोही रामचन्द्र और वही बने यदुराई
वही बाहू वही निष्कलंक भक्तों के सदा सहाई 2॥

धरण...

30- थोड़े से दिन की बात है....

थोड़े से दिन की बात है
नर अचेत बुढ़ापा आया ॥ टेक ।


जब इस काया को बुढ़ापा घेर लेगा आय
जर्द होज्या रंग चमड़ी हाडों सेती छूट जाय
बोदे पड़ ज्यां अस्थ नाड़ि मंद मंद चसकाय
साँध सारी ढीली होज्यां बल कुछ रहै नांय
सोवणे को झर झोली
...

31- नर इस मतलबी जहान में....

नर इस मतलबी जहान में
बता कौन मित्र है तेरा ॥ टेक । (त्रिभंगी)


बंदे सुन ले धरकै ध्यान, तुझको देते गुरु ज्ञान, भला होगा निश्चय जान, मान मेरे प्यारे
तात मात सुत नार, गोती नाती परिवार, सब मतलब के हैं यार, प्यार करै सारे
देख तेरे ...

32- अजी एजी जगत में दम.....

अजी एजी जगत में दम ही दम का मेला
दम गया मेला बिछड़ गया फिर मिलना बड़ा दुहेला ॥ टेक । (सांगीत)


प्रियव्रत पृथु मानधाता सगर अजयपाल
कथा अब शेष रही काल की ना हुई टाल
बेन की दुहाई फिरी गयी थी त्रिलोकी हाल
हिरणाकुश रावण जीते स्व...

33- चार वेद युग चार आश्रम चार....

चार वेद युग चार आश्रम चार चार ही वर्ण ॥ टेक ।

सतयुग मे ऋग्वेद था सन्यास का था बर्ताव
विप्र वर्ण के झंडे फरके राजा राणा राव
पुजते सब विपरों के चरण 1॥

त्रेतायुग मे यजुर्वेद था वानप्रस्थ प्रधान
क्षत्रीवर्ण के झंडे फरक...

34- मत फंसै मोह के जाल में....

मत फंसै मोह के जाल में
फंस गया तो पछतावैगा ॥ टेक । (सांगीत)


होगी दुखदाई जिस दिन सरकारी चढै हुकम
आय कै आचनक सेती पकड़ तोहे लेगा यम
कंठ कफ बोलन लागै रह ना ठिकाने दम
हिचकी पे हिचकी चालैं श्वास आवै थम थम
दसों दर घिरैं जब दीख...

35- यूं ही जन्म अगारथ खोया....

यूं ही जन्म अगारथ खोया
कोई सुकरत नहीं बन आया ॥ टेक । (सांगीत)


सुफल हुई कमाई भाई राजी हुए भगवान
जब तुझको ये नर देही बंदे मिली आन
हाथ तो दिए थे सेवा पूजा करने को दान
नेत्र दिये दर्शनों को ज्ञान सुनने को कान
रसना राम रटन...

36- दिन भूला कोल करार का....

दिन भूला कोल करार का
क्या अमर समझ लई काया ॥ टेक । (सांगीत)


बेहोशी में फिरता बन्दे तुझको नहीं जरा ख्याल
देख इस काया ऊपर कितने बिछे हैं जाल
शीश ऊपर मौत बैठी उमर को खाता है काल
दम दम श्वास घटै कद लग होगी टाल
बुढापा भी चला ...

37- दस इंद्री हैं इस अंग में....

दस इंद्री हैं इस अंग में
प्रकृति न्यारी न्यारी ॥ टेक । (सांगीत)


पांच तो हैं ज्ञान इंद्री पाँच कर्म इंद्री जान
पांच तत्व तीन गुण दसों का उपमान
इनसे प्रगट हुये न्यारे न्यारे स्थान
दसों की प्रणाल
गई न्यारी न्यारी चाल ...

38- दम दम घटै नूर शरीर का....

दोहा –
तुलसी मीठे वचन से सुख निपजै चहूँ ओर ।
वशीकरण ये मंत्र है तज दे वचन कठोर ॥

दम दम घटै नूर शरीर का
नित समय पलटती जा है ॥ टेक । (सांगीत)


पहले थी सो अब नहीं अब है सो आगे नांय
दिन दिन बंदे तेरी अवस्था उतरती जाय
क्...

39- जहां मेरुदंड आधार है.....

जहां मेरुदंड आधार है
षटचक्र बने काया में ॥ टेक । (सांगीत)


गुदा में है मूलचक्र दल जाके बने च्यार
रक्त रंग खासा बना छूट रही मंहकार
सूरत चकोर और सम जा का आकार
जहां बसैं अष्टसिद्धि
संग रहैं नौ निधि
वास करैं ऋद्धि वृद्ध...

40- हरदम रह्या कुसंग में.....

हरदम रह्या कुसंग में
सत्संग नहीं करता है ॥ टेक । (सांगीत)


कर्ण इंद्री के बस हो रसीले तू राग सुनै
नत्था दीपा आला राजा निहालदे निर्भाग सुनै
ख्याल छोटे पंथ गहरा शाह की बेलाग सुनै
सांगियों का झटका लोकलाज शर्म त्याग सुनै

41- सब चला चली संसार है....

सब चला चली संसार है
कोये अमर नहीं मोहे पाया ॥ टेक । (त्रिभंगी)


रावण हिरणाकुश शिशुपाल, वृत्त कंस धुन्धमाल, ऐसे ऐसे गये चाल, काल ले गया उठाय
चकवे हो गये छोमान, जिनके फरकते निशान, ऐसे ऐसे बलवान, लिए मौत नै सताय
चले चक्र अजगैव...

42- सुकरत बिन से संसार मे....

सुकरत बिन से संसार मे बंदे नरदेह क्यों धारी
बैरी बनकर रह्या पेट मे माता बोझ न्यूई मारी ॥ टेक ।


खाना पीना चलना सोना करना मैथुन और आराम
इतना तो पशु भी करते पक्षी भी करते है तमाम
जप तप नियम धर्म व्रत क्रियाकर्म और तीर्थ धा...

43- बिना हरी के भजन सजन....

बिना हरी के भजन सजन ये काया किस काम की
किया नहीं शुभकर्म धर्म बिन नहीं ये छदाम की ॥ टेक ।


धर्म में भांजी मारी तारी चढ़ती बेल तनै
कामी क्रोधी लोभी कीन्हे खोटे खेल तनै
गरीब सताये बिन खोट लई घाल नकेल तनै
सत्पुर्षों कै वाण...

44- मेरा अबतो पीछा छोड़....

मेरा अबतो पीछा छोड़
अरे मन परमादी ॥ टेक ।


कर हराम मत अरे हरामी
पल्लै बांध लई बदनामी
दागी कर दिया आ रही खामी
धूल गिराई सभ ठोड़
अरे विषियों के स्वादी 1।।

जूवा जुल्म चोर अन्याई
करा अनरथ झूठ बुलाई
सोना कै तैं ला दई क...

45- नर कभी तो सोच विचार कर....

नर कभी तो सोच विचार कर
तू किसका कौन तेरा है ॥ टेक । (सांगीत)


तात मात भ्रात सुत गोती नाती परिवार
कोई नहीं इनमें तेरा स्वार्थी है संसार
मंगत सबकी कर चुक्या कर्ज को रह्या हार
कोई कोई तेरा करजी तू है उनका साहूकार
दिये की...

46- जन्म मरण पर्यंत देह का.....

जन्म मरण पर्यंत देह का सुन ले सारा हाल ॥ टेक ।

चौताल-
एक बृत्रासुर हुया असुर बड़ा बलदाई
जन त्वष्टा ऋषि के मंत्रों से देह पाई
जा करी असुर ने इंद्र से घोर लड़ाई
इंद्र नै चक्र से असुर की नाड़ उड़ाई

शेर -
दाने के मरने ...

47- शोधन कर सकल शरीर का.....

दोहा –
देह का वर्णन करूं, सुनो गुणी धर ध्यान ।
ऋषि मुनीजी कह गए, शास्त्रोक्त परमान ।।

शोधन कर सकल शरीर का
कर खोज भेद कुछ पावै ॥ टेक ।

लावणी –
पहले पांच कोष का खोज करो इस तन में
इसके भीतर प्राणमय कोष झूठ ना इनमें
...

48- सुन विराट का वर्णन तेरा....

दोहा –
देह का वर्णन किया, श्रुति स्मृति रीति से ।
अब विराट वर्णन करूं, वेदों की प्रतीति से ॥


सुन विराट का वर्णन तेरा सकल भ्रम हो दूर ॥ टेक । (विराट वर्णन)

चौताल-
है बीज ब्रह्म हुई प्रगट ब्रह्म से माया
माया के ग...

49- ज्ञानी गाते इस चाल सैं....

ज्ञानी गाते इस चाल सैं
ये अधरछंद का लटका ॥ टेक । (अधरछंद)


लावणी -
ये असल अधर है अखल अजर नर चित्त लगाकर धरले ध्यान
धर ध्यान यार तज अहंकार ले ज्ञान सार निश्चय कर जान
जानै थे हाल दशरथ तत्काल हरि करकै ख्याल आये अस्थान
अस...

50- जाग रे मुसाफिर अब तो.....

जाग रे मुसाफिर अब तो सो लिया बहतेरा रे ॥ टेक ।

तीन पहर बीत गए निद्रा नै घेरा रे
कट रही गांठ तेरी तुझे नहीं बेरा रे 1॥

ठगों का यो घर है जिसमें किया तैनै डेरा रे
तेरे ज्यूं सोवनियाँ इसमें लुट गया घनेरा रे 2॥

पाँच ठग पच्...

51- सोवण में सारी रैन गई.....

सोवण में सारी रैन गई
अब तो जाग मुसाफिर जाग रे ॥ टेक ।


चन्दा की छवि फीकी पड़ गई हो गए मंद चिराग रे
उड़गण अस्त मंडेरै बैठा बोल रह्या है काग रे 1॥

भानु उदय होने का बख़्त हुया अबतो निद्रा त्याग रे
बिछड़ा साथ जाय रह्या तेरा तू भ...

52- परजा का लग रह्या बहीर.....

परजा का लग रह्या बहीर
मांगत चूकैं झड़ै जामिनी जन्मै मरै शरीर ॥ टेक ।


मृत्यु की चल रही कटारी बगैं काल के तीर
रोग बहाना धर धर जा रहे राजा रंक फकीर 1॥

मौत के आगै चलै नही जड़ी बूटी लख ततबीर
कोट किले गढ छोड़ चले बेगम बादशाह वजी...

53- अरे मन जगह जगह मत....

अरे मन जगह जगह मत भटकै
हरि भज एक ठिकानै डट कै ॥ टेक ।


कांशी अयोध्या मथुरा जा जा मंदिरों में सिर पटकै
जिसको ढूंढ रह्या वो तुझमें लख घट पाट उलट कै 1॥

सतयुग में कुम्हरी नै घर ही राम नाम को रट कै
जलती भाय में मंझारी सुत रख द...

54- दिन आ गया निकट करार....

दिन आ गया निकट करार का
उस दिन क्या क्या कर लेगा ॥ टेक ।


दो दो नाम जो नित को गाता
तो भी लंक बहोत लग जाता
तूँ आगै आगै टहलाता
दिन यूं ही जां बेकार का
एक दिन क्या मुंह भर लेगा 1॥

जो नित मूंठी बाँटता दाना
लग जाते पर्वत पा...

55- क्यूँ भूला फिरै अभिमान में.....

दोहा –
आया था किस काम को, क्या करन लग्या नादान ।
इस भूल भ्रम के बीच में, तो है तेरा नुकसान ॥


क्यूँ भूला फिरै अभिमान में
बंदे कर भजन हरी का ॥ टेक ।

लाख वर्ष की जिंदगानी थी
काया बहोत बड़ी मानी थी
तीन लोक की रजधानी थ...

56- अब और ना कुछ बन आवै....

अब और ना कुछ बन आवै तो भज मन राम राम राम ॥ टेक ।

अरे कामी क्रोधी लोभी लंपट बांध वदी की पाग
करतब यादकर क्या क्या कर चुका अबतो अनर्थी त्याग
बदी के काम काम काम 1॥

अरे स्वार्थी पेट के पाजी उम्र कुसंग के माहीं
सारी वृथा गंवा...

57- सबसे मिलकर चाल....

सबसे मिलकर चाल
बंदे तज दे गरूरी ॥ टेक ।


राजा रंक चले जाय रहे हैं
क्या धनी क्या कंगाल
सबको चलना जरूरी 1॥

पंडित गुणी और वैध धनंतर
उनकी भी नहीं हुई टाल
जिन पै थी विद्या पूरी 2॥

जैसे चिड़िया को बाज झपटता
ऐसे झपट लेग...

58- कर भजन उसी का जिसनै....

दोहा –
मेरी तेरी में दिन गया, गई सोच फिकर में रात ।
एक पलक हरि नहीं भजा, हो गई फिर प्रभात ॥

भजन कर भजन उसी का जिसनै यो दिया है शरीर ॥ टेक ।

वो मालिक तेरा उपकारी
जन करी गर्भ में पार निवारी
बिना खराद उसी नै तारी
सुं...

59- पता नहीं चलता किस बिध....

पता नहीं चलता किस बिध राजी करतार ॥ टेक ।

पापी कै धन माल घणा और बहोत घणा परिवार
धर्मधारी कै धन कुटम्ब की होती देखी हार 1॥

पतिव्रता के पाटे कपड़े वेश्यां कै सिंगार
नार सुलखणी बाँझ कुलखणी कै बेटां की लार 2॥

सूम के घर में ...

60- ला ले राम भजन से हेत.....

ला ले राम भजन से हेत
गई सो गई रही सो जा रही अब भी मूर्ख चेत ॥ टेक ।


मौत जिन्हों के पैर दबाती काल हाजरी देत
काल कै धक्कै वै भी चढ़े जिन बांधा सागर सेत 1॥

धरती तोला नहीं रहे और रहे नहीं बानेत
जिनकी फूंक से घास जलै उनकी काया ...

61-तेरी छुट ज्यागी चौरासी.....

तेरी छुट ज्यागी चौरासी भज मन राम राम राम ॥ टेक ।

कबाबी अजामेल हत्यारा
शराबी वेश्यां का प्यारा
जन नारायण नाम उचारा
नाम से कट गई यम की फांसी 1॥

होकर निराश टेरी गनका
पाप सब दूर हुया पापन का
यो फल पाई राम भजन का
प्रभ...

62- भज मन राम -राम –राम....

भज मन राम - राम – राम
श्री कृष्ण गोविंद दामोदर वासुदेव घनश्याम ॥ टेक ।


राम राम प्रहलाद पुकारा
नरहरी रूप राम नै धारा
हिरणाकुश का उदर विदारा
सारया भगत का काम 1॥

आधा नाम लिया सुंडाला
जल में पहुँच करी पृथपाला
हता ग...

63- भजन बिन तेरा जीवन....

भजन बिन तेरा जीवन जन्म फिजूल ॥ टेक ।

गर्भवास में करार कर कै
आया बाहर वचन तू भर कै
बेकोली नुगरे देह धर कै
वचनों को गया भूल 1॥

चोरी जारी चुगली हांसी
हंस-हंस करी खूब बदमाशी
रोवैगा जब घलैगी फांसी
सिर में पड़ैगी धूल 2॥

64- अब तो बांध भजन का बाना....

अब तो बांध भजन का बाना
ऐसा बख्त फेर नहीं पाना ॥


चौरासी में भरमत भरमत गुजरा बहोत जमाना
लाखों जन्म सहे दारुण दुख तब मिला है तोहे ये ठिकाना 1॥

बालापन गया गई जवानी हुया वृद्धापन का आना
वृद्धापन भी नहीं रहैगा फिर पीछै पछत...

65- प्रभु जी तुम मत जाईयो.....

दोहा –
श्वास श्वास भज राम को, वृथा श्वास मत खोय ।
ना जानों इस श्वास का, आवन हो कि ना होय ॥


प्रभु जी तुम मत जाईयो
भूल पतित मोहे जान कै ॥ टेक ।

गर्भ में पालन किया था जब रह्या नरक कुंड में झूल
संकट काटा बाहर पठाया आया ...

66- प्रभु जी क्या क्या कराऊं....

प्रभु जी क्या क्या कराऊं तुमसे माफ
गुनाह तो मेरी बहोत घनी ॥ टेक ।


गीद्ध ब्याध सदना गणका से कम ना मेरे पाप
पापी पापों की दलदल में होय रह्या हूं गरगाप
बिगाड़ी आपै ही अपनी 1॥

अबतक तो आगा नहीं दीख्या अब दीखन लगा साफ
करतब ...

67- राम भजन सैं ला ले हेत.....

राम भजन सैं ला ले हेत
गया वक्त कुछ जा रह्या ॥


बालापन गया खेल में
जवानी त्रिया के मेल में
चेता जा तो अब भी चेत
निकट बुढ़ापा आ रह्या 1॥

फिर पीछै पछताएगा
हरिभजन बिना रह जाएगा
ज्यूं रहज्या कालर का खेत
भूल में गांठ क...

68- मुसाफिर तुझमें बनी तो ये.....

मुसाफिर तुझमें बनी तो ये कैसी बनी ॥ टेक ।

बड़ी दूर से चलकर आया
बहोत सा द्रव्य कमाकर लाया
मुश्किल से संचय करी माया
सही थी विपत घनी 1॥

तन सराय में आकर सोया
सोकर अपना सर्बस खोया
आँख खुली मूंडी धुन रोया
लूटा पाँच जनी 2...

69- पुगाये गये ना गर्भवास के कोल....

पुगाये गये ना गर्भवास के कोल ॥ टेक ।

भरा पेट छा गई अंधेरी
अनरथ लग्या करन हर बेरी
यहां तो खूब चाल रही तेरी
वहां ना चलैगी पोल 1॥

तुझेओर कुछ भी नहीं सूझा
सूझी एक पेट की पूजा
यम के घर उघड़ैगी बूझा
आगै धरै बही खोल2॥

ग...

70- भक्ति बस हो आंवते जी भक्तों....

भक्ति बस हो आंवते जी भक्तों के प्यारे भगवान ॥ टेक ।

ब्याध कोई षटकर्मी नहीं था ध्रुव था नहीं महान
कहो गजेन्दु कब गया कांशी कद पढे वेद पुराण 1॥

कुबजा ना गुण रूपवती थी सुदामा नहीं धनवान
उग्रसेन कोई बली नहीं था विदुर का क्...

71- उठ प्रभात लिया कर नाम....

उठ प्रभात लिया कर नाम
हरे कृष्ण – कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण हरे राम ॥ टेक ।


खाना पीना चलना सोना और करना आराम
इतने काम तो पशु भी करते पक्षी करैं तमाम 1॥

इन कर्मों से मनुष्य बनै ना मनुष्य के और ही काम
स्नान ध्यान जप हवन वंदन ...

72- कर ले राम नाम का जाप....

कर ले राम नाम का जाप
राम भजन बिन और तरह से धुवैं ना तेरे पाप ॥ टेक ।


झरना लिया न लई समाधी किया ना धूनी ताप
वज्रपाप करकरकै घर में जाय बड़ा‌ चुपचाप 1॥

औरों को तो राह बतावै चलै ना उस राह आप
वो पापी मझधार में डूबै संग डूबैं मा...

73- प्रजा लागी बहीर.....

प्रजा लागी बहीर
बिछड़ा जा रहा मेला ॥ टेक ।


शाह बादशाह निशदिन बिछड़ैं
बेगम और वजीर
जा रहा पंथ दुहेला 1॥

माँ बापों से बेटा बिछड़ ज्या
बिछड़ैं मर्द और बीर
बिछड़ैं गुरु और चेला 2॥

भाइयों की नित जोड़ी बिछड़ैं
राजा रंक फक...

74- लिया मैं तेरे नाम का आधार....

लिया मैं तेरे नाम का आधार ॥ टेक ।

हे ईश्वर मैं ध्यानी नहीं हूं
ज्ञानी और विज्ञानी नहीं हूं
परोपकारी और दानी नहीं हूं
हूं नहीं मैं दातार 1॥

दयाल मैं निजधर्मी नहीं हूं
वेदपाठी षटकर्मी नहीं हूं
पापआत्मा सुमर्मी न...

75- अबतो दया करो भगवान.....

अबतो दया करो भगवान
भू भार हरो अवतार धरो हुया धर्म से पतित जहान ॥ टेक ।


दया धर्म सत्संग रह्या ना भक्तिभाव और ज्ञान
तीर्थ व्रत से प्रेम हटा नहीं दान का कहीं निशान 1॥

दुनिया में पैदा हो गए चोर जार बेईमान
झूठे चुगल शराबी ...

76- दिन बदफैली में खोय दिये बदफैल....

दिन बदफैली में खोय दिये बदफैल ॥ टेक ।

हरदम नीत रही परधन में
परत्रिया सदा बसी रही मन में
पल नहीं बैठा राम भजन में
गलियों में फिरा छैल 1॥

निंदा बैर झूठ बेईमानी
इनमें खोय दई सभ जवानी
अनरथ कर रह्या शैतानी
शैतानों की...

77- होगा नहीं हरि नाम बिना.....

होगा नहीं हरि नाम बिना
अब तो सुधार नर तेरा ॥ टेक ।


गीध व्याध सदना गज गनका
बड़ा वज्रपाप था जिनका
नाम से पाप माफ सब इनका
हुया तीर्थ व्रत धाम बिना
पाया बैकुंठ बसेरा 1॥

वाल्मीक अजामेल सुधर गये
नाम से भस्म पापों को कर ...

78- चल्या जाय रहा संसार.....

चल्या जाय रहा संसार
कटारी चल रही काल की ॥ टेक ।


तात-मात-सुत-भ्रात जा रहे जा रहे जा रही परणी नार
प्राण पियारी नारी तज जाय रहे भरतार
घर दर की तजकर मालकी 1॥

घड़ी में घड़ावल बाज पड़ैं बिछड़त नहीं लागै बार
रमताराम खबर नहीं कित...

79- है मुश्किल प्रेम पद पाना मन....

है मुश्किल प्रेम पद पाना मन तदाकार हुये बिना ॥ टेक ।

भिलनी के बेर सुदामा के तंदुल प्रेमी विदुर का साग
रुच रुच भोग लगाया हरि दई मेवा मिश्री त्याग
प्रेमरस जाना जन जाना 1॥

राज को ठोकर मार प्रेम बस हो मीराबाई
कृष्ण का घर ...

80- सुधारा जा तो अब भी....

सुधारा जा तो अब भी जन्म सुधार ॥ टेक ।

जीवन जन्म बिगड़ रह्या तेरा
क्या बिगड़े का तुझे ना बेरा
अक्ल तेरी पै छाया अंधेरा
करता नहीं विचार 1॥

लख चौरासी भोगत आया
दुख सह-सहकर नरतन पाया
लाखों जन्म का करा कराया
खोय दिया ब...

81- सुना था तेरा पतित उद्धारन....

सुना था तेरा पतित उद्धारन नाम ॥ टेक ।

बाल्मीक अजामेल से पापी
कर दिये पार तेरे ओ साफ़ी
गनका की भी हो गई माफी
नित उठ करती हराम 1॥

गिद्ध ब्याध महापापी सदना
जिनके पापों की कुछ हद ना
तेरे नाम से आला अदना
हो गये पार तमा...

82- प्रेम बस हो मीराबाई.....

प्रेम बस हो मीराबाई
साधां की संगत करै डरै ना समझै समझाई ॥ टेक ।


सर्प पिटारा राणै भेजा मीरा आजमाई
हार बना पहन लिया गल में जरा ना भय खाई 1॥

विष का प्याला भेज दिया राणा कै बदी छाई
विष अमृत हो गया पी गई जरा न सकुचाई 2॥

से...

83- तेरी दबै ना चोरी एरे....

तेरी दबै ना चोरी एरे राम के चोर ॥ टेक ।

धर्म अदालत है इनसाफ़ी
वाहां का मालिक दे नहीं माफी
रहैं केस चोरौं के काफी
बहोत घणी हो गोर 1॥

वाहां बारेष्टर वकील नहीं है
सजावार की अपील नहीं है
मुकदमा वाहां तब्दील नहीं है
ह...

84- यम कै मार्ग में चलना है....

यम कै मार्ग में चलना है भाई ॥ टेक ।

यम मार्ग में कांटे कंकर
तपत रेत एक नदी भयंकर
धर्महीन पापी बर्ण संकर
घालैं देख दुहाई 1॥

यम-मार्ग में बाजार नहीं है
निर्जल अन आहार नहीं है
क्रय विक्रय व्योपार नहीं है
होगी महाद...

85- बंदे मत अभिमान करै....

बंदे मत अभिमान करै
बल जोबन धन और गुन का ॥ टेक ।


बालापन चंचल कहलाता
देख जवानी क्या गर्भाता
एक दिन चाल बुढ़ापा आता
ये तुझको हैरान करै
ज्यूं चना हुया घुन का 1॥

हरीचंद हुया सतधारी
मोरध्वज भगत हुया भारी
थी शिवि कर्...

86- कुछ करले सुफल कमाई....

कुछ करले सुफल कमाई
सुकरत हित देह धरी थी ॥ टेक ।


चौरासी में भरमत आया
नरतन जतन कठिन से पाया
अणमोलक ये लाल कहाया
जनमत बंटी बधाई
जननी जन चाव भरी थी 1॥

पेट तो पशु पक्षी भी भरैं हैं
विषय भोग क्या नहीं करैं हैं
सुकरत क...

87- बचपन खोया खेल जवानी....

अब तो भज ले हरि का नाम
हरे राम हरे राम हरे राम हरे राम हरे राम हरे राम हरे राम ॥ टेक ।


बचपन खोया खेल जवानी किये बदी के काम
बुढ़ापा भी यूं ही जा रहा समझै नहीं पेट के गुलाम 1॥

तीरथ व्रत कुछ बणा नहीं तैं करा ना कोई धाम
दान दक्ष...

88- मूरख अबतो कर कुछ ख्याल....

मूरख अबतो कर कुछ ख्याल
तेरा बचपन गया जवानी गई लई बुढ़ापै घेरी घाल ॥ टेक ।


जी: आंख्यां आगै छाई अंधेरी जाड़ दांत गया हाल
कानौं सैं कम सुनन लग्या सिर के सफ़ेद हुये बाल 1॥

जी: जोड़ तोड़ डाख हो गए हाड़ों से छूट गई खाल
हूलिया रोज बि...

89- कर जतन कठिन कठिनाई....

कर जतन कठिन कठिनाई सैं ये नरदेह धारी है
हरिहर रटले डटले सत तेरा हितकारी है ॥ टेक । (अधरछंद)


सत संगत का खेल जगत अन्दर नहीं छानी
सत का साधन कर गये नर हरीचंद दानी
राज रजधानी तज दिये सत हित लड़का सती नारी है 1॥

रह गई यादगार ज...

90- भू भार उतारन कारण....

भू भार उतारन कारण प्रभु अवतार लीजिये
भंवर बीच भारत की नैया पार कीजिये ॥ टेक ।


विप्रों के षटकर्म कभी से धर्म शास्त्र बतलाते
विद्या पढ़ औरों को पढ़ाते यज्ञ करते और कराते
सबसे पहले देते दान फिर औरों से दिलवाते
धर्म नौका ...

91- चलना है मुसाफिर आगे....

चलना है मुसाफिर आगे की डगर बुहार ॥ टेक । (जंगम)

मत बोल झूठ ले दिल को डाट रख दया हृदय में तज गुमान
काहू की बुरी मत मन में धार मत किसी जीव की कर तू हान
परनिंदा पाप की राही मान तूं परधन को हलाहल जान
परनारी पैनी छुरी समझ मत झूठी ...

92- तुम हो दीनानाथ दयाल....

तुम हो दीनानाथ दयाल
प्रभुजी मैं तो दीन हूं ॥ टेक ।


ना तो बांहबल ना कायाबल ना मेरै धनमाल
ना मेरे में विद्याबल है सब तरियों कंगाल
बल विद्या बुद्धिहीन हूं 1॥

जबसे मैंने आपा चेत्या चाल्या चाल कुचाल
आपा को लानत द्यूं ज...

93- अबतो दे रहा अगम दिखाई....

अबतो दे रहा अगम दिखाई
पापी का उदय भाग हुया ॥ टेक ।


काम क्रोध मद लोभ से रही ना मित्रताई
बिन मारीं मन मरता आवै इंद्री दसों शिथलाई
अबतो दे .....1॥

झूठ ईर्ष्या निंदा चोरी जारी मान बड़ाई
ये तो बहोत ही प्यारी लगती इनसे भी घृण...

94- मूरख गाफिल हो रहा सोय....

मूरख गाफिल हो रहा सोय
आँख खुली जब पछताया अब पछताईं क्या होय ॥ टेक ।


तीन पहर सूते कूं हो लिया चेत हुया ना तोय
चौथे पहर तेरी आँख खुली गठड़ी कूं रह्या टोय
मूरख गाफिल ..... 1॥


गठड़ी में मिला टका बैराठी और ना वस्तु कोय
हीरा पन...

95- हरी के भजन बिना तैने.....

हरी के भजन बिना तैने जन्म अमोलक खोया ॥ टेक ।

दिनभर तो करी उदरपूर्णा रात हुई पड़ सोया
पेट के पाजी बखत लिकड़ गया जिगरी दाग नहीं धोया
हरी के भजन .... 1॥

धर्म का काम करा नहीं सभ दिन बोझ बिगारी ढ़ोया
किसके सिर तूं दोष धरैगा आपा तै...

96- दीन की बीनती तमतो.....

दीन की बीनती तमतो सुणते हो दीनानाथ ॥ टेक ।

होकर दीन गयंद पुकारा गज की चढ़े हिमात
समझकै दीन विभीषण का तमी गहके पकड़ लिया हाथ
दीन की बीनती .... 1॥

होकर दीन द्रोपदी टेरी उघड़न दिया नहीं गात
बखत पड़ा जब दीन समझकर नरसी का दिया सा...

97- राम भजै तो समता धार....

राम भजै तो समता धार
समता धारीं हो बेड़ा पार ॥ टेक ।


जी: रिस मारीं रसाण पैदा हो रिस का मूल अहंकार
अहंकारी अहंकार में आकै करदे अत्याचार
राम भजै तो समता धार ... 1॥

जी: किसी से बैर बिसावै मतना सबसे करले प्यार
सबका प्यारा बनक...

98- कमाई लाखों जन्म करी है....

कमाई लाखों जन्म करी है
जब या देह मानषा पाई ॥ टेक ।


मनचाही तैं करी रातदिन समझी ना समझाई
धर्मराज जब लेखा लेगा होगी महादुखदाई
देह मानषा पाई ... 1॥

देही मानषा पाय करी चोरी जारी अन्याई
धरती ऊपर बोझ बधाया जननी की कूख लजाई

99- जगत है ये काल का.....

जगत है ये काल का खाजा रे ॥ टेक ।

भीम सरीखे गदा घुमागे
उन नै भी काल चूंट कै खागे
कोई थोड़ा कोई घना बजागे
अपने वक्त का बाजा रे 1॥

दो दिन मेरा मेरी कर गए
धन न जोड़ जमीं में धर गए
सबकुछ यहीं पर छोड़ डिगर गए
चकवा बैन से रा...

100- तेरा किस बिध हो कल्याण....

तेरा किस बिध हो कल्याण
बाण तजै ना राम भजै ना भूल रह्या ओसाण ॥ टेक ।


अबतो सबकुछ जाण रह्या बचपन में था अनजाण
पहले झूठ बोलणा सीख्या पीछै सीख्या खाण
तेरा किस बिध हो कल्याण ... 1॥

जवानी में चोरी जारी की पकड़ लई तैं बाण
बोली झ...

101- कीमत ना पाई लाल की....

कीमत ना पाई लाल की रे
बट्टा बाजी में दिया खोय ॥ टेक ।


लाल लाल सब ही कहैं रे लाल जगत में दोय
एक समुन्द्रीं नीपजै एक भली कूख से होय
कीमत ना पाई लाल की रे ... 1॥

लाल समुद्रीं की कीमत नो करोड़ राखी टोय
कुखिया लाल कै धड़ै चढै ना ...

102- पल में बज ज्या कूच नगारा....

पल में बज ज्या कूच नगारा
टांडा लाद चलै बणज्यारा ॥ टेक ।


जितनी खेंप करी तैने सबही में तैं नफा मारा
अबकी खेंप में अरे व्योपारी पड़ता दीखै किसारा
पल में बज ज्या कूच नगारा ... 1॥

तेजी का भरा हुया माल तैं मंदा में फटकारा
यह...

103- गुरु बिन हो नहीं बेड़ा पार....

गुरु बिन हो नहीं बेड़ा पार
सुगरा पार सधै भव से नुगरा डूबै मझधार ॥ टेक ।


गुरुबिन ज्ञान ज्ञानबिन मुक्ति हो नहीं जन्म हजार
मुक्तिबिन लख-चौरासी चक्कर में टक्कर मार
गुरु बिन हो नहीं बेड़ा पार .... 1॥

साख सुणी नुगरा के शीशपर ल...

104- भला चाहै तो मन को मार....

भला चाहै तो मन को मार
मन मारीं होवै बेड़ा पार ॥ टेक ।


मन के मतै न चालिये नरमन के मते हजार
चोरी जारी बेईमानी छल मन के सकल विकार
भला चाहै तो मन को मार ... 1॥

मन रोकीं दस पांच रुकैं हैं करले खूब विचार
आगा पीछा सुधरै तेरा मन क...

105- उंवर के दिन गये सो....

उंवर के दिन गये सो गये
बाकी रहे सो भी जाय रहे हैं ॥ टेक ।


बचपन गया जवानी गई बिरधापन आय रहे हैं
बिरधापन कूं देख देख अब हम घबराय रहे हैं
उंवर के दिन ... 1॥

अच्छे दिनों में बुरे कर्म किये अब पिछताय रहे हैं
अब ना कुछ बणती मे...

106- ऐसी क्या तेरै छा रही....

ऐसी क्या तेरै छा रही भूल
बिरथा बखत को खो रहा ॥ टेक ।


मालिक का हुकम बिसार कै
तूं चिपटा किस बिगार कै
बेअकल तेरै सिर में धूल
बोझ बिगारी ढो रहा 1॥

तैने ओटी थी सुबह शाम की
करूं रटना उसके नाम की
मालिक का हुकम किया अदूल
...

107- बंदे राम नाम गुण गाय....

बंदे राम नाम गुण गाय राम
भजन बिन बंदे तेरा जीवन अगारथ जाय ॥ टेक ।


नो दस मास सहे दुख दारुण वास गर्भ में पाय
करकै कोल बाहर आया वै बोल तैं दिये बहाय
बंदे राम नाम गुण ... 1॥

बालापन गया गई जवानी बुढापा भी गया आय
तीनों पहरे ह...

108- सार हरिनाम है जी....

सार हरिनाम है जी
बन्दे असार दुनिया में ॥ टेक ।


चलना खाना पीना सोना
डोलना बोलना हंसना रोना
रट ले कदे ना निष्फल होना
सुख का धाम है जी 1॥

भजन से पाप भस्म हों ऐसे
अगन से रुई भस्म हो जैसे
बिन धुनी बिन लय से
भजन किस का...

109- कितनी गलती खाई रे....

कितनी गलती खाई रे
लाखों जन्म की करी कमाई खाख मिलाई रे ॥ टेक ।


चौरासी चक्कर में सहै दारुण दुखदाई रे
पर-उपगार आये करते जब नरदेह पाई रे
कितनी ... 1॥

नरदेह पाय करी चोरी जारी अन्याई रे
दिन गए मेरी तेरी में सोय रात गंवाई रे

110- मनुवा स्वार्थी रे परमारथ....

मनुवा स्वार्थी रे परमारथ नांह बण आया ॥ टेक ।

राम भजा ना बरत करा ना ना कभी तीरथ न्हाया
बह-बह मरा बैल की नाईं सोया रहा उठ खाया
मनुवा स्वार्थी रे ... 1॥

दान किया ना पुण्य किया ना धर्म में कोडी लाया
भूखे कूं ना भोजन दीन्हा प्...

111- कभी तो कहना मान अरे....

कभी तो कहना मान अरे मन शैतानी ॥ टेक ।

बालापन गया खेल मे किए बहोत परमाद
वो तै समझ पकड़ी नहीं जो पकड़ी ध्रुव प्रह्लाद
पद पा गए निर्मानी 1॥

जवानी पहरे रातदिन करता फिरा हराम
समझाए समझा नहीं होय लिया बदनाम
यूं ही खो दई जवा...

112- म्हारे धुवैं ना बज्रपाप बिना.....

म्हारे धुवैं ना बज्रपाप बिना हरिनाम के जी ॥ टेक ।

खाया मांस छोंक कर रुच-रुच पीई शराब
वेश्यां भोगकर अरे नालायक जिंदगी करी ख़राब
सुकुल में जाम के जी 1॥

भाइयों का बुरा किया और करे काम बेजोग
अपनी चलती में तैंने दुखी करे स...

113- कर लिया देश तल्लाश मैं....

कर लिया देश तल्लाश मैं
प्रभु पाए प्रेम कुटी में ॥ टेक ।


कभी वार गई मैं कभी हार गई मैं
फिरते फिरते हार गई मैं
स्वर्ग नरक कई बार गई मैं
पृथ्वी पवन आकाश में
जल अग्नि से जाय जुटी मैं 1॥

लख चौरासी जाय चुकी मैं
विरह अग्...

114- अरे अनर्थी तैं अनरथ बहोत....

अरे अनर्थी तैं अनरथ बहोत करे ॥ टेक ।

ले चांडाल पराया करजा
मार लिया तेरा हिया ना लरजा
बहोत बुरा तेरा होगा दरजा
कृमि कुण्ड परे 1॥

काटी बणी गरीब सताया
ले ले कोड़ हक बेहक खाया
गौओं का तैं गल कटवाया
कण्ठ कटार धरे 2॥

...

115- बंदे हरि का नाम सुमरणा.....

बंदे हरि का नाम सुमरणा
तेरा सुफल होय देह धरना ॥ टेक ।


ध्रुव प्रह्लाद नै बचपन में लिया राम नाम का शरणा
दारुण दुख सहे नाम तजा ना मांड दिया था मरणा 1॥

बाल्मीक अजामेल सदन का पाप जाय नहीं बरणा
राम नाम से शुद्ध होय भवनिधि से...

116- नर क्यूं करता मेरा मेरी....

नर क्यूं करता मेरा मेरी जगत में थोड़ा सा उनमान ॥ टेक ।

रावण भूप हुया अभिमानी
नही शंका काल की मानी
हड़ लई थी राम की रानी
लंका कर दई खाक समान 1॥

लंका सो कोट समुद्र सी खाई जहां रावण की फिरै थी दुहाई जिनका कुम्भकर्ण सा भाई ब...

117- बिन भाग मिलै ना दुनिया मे....

बिन भाग मिलै ना दुनिया मे अमृत भोग ॥ टेक ।

मधु होय अमृत के समाना
स्वान खाय झट तज दे प्राणा
मक्खी करै गंदगी पाना
घी से प्राण वियोग 1॥

मिश्री होय अमृत सम प्यारा
खर को दे तो तुरत जा मारा
कौवा खाय नीम फल खारा
दाख मिल...

118- तेरी हो ज्या सुफल कमाई....

तेरी हो ज्या सुफल कमाई भज मन राम राम राम ॥ टेक ।

भोगे नरक सहे दुख चोरासी में टक्कर खाई
पर उपकार आया करता जब देह मानषा पाई 1॥

खान पान तिरिया विलास है सभ जूण्यों के माहीं
नर जूणी बिन और जूण में राम भज्या जा नाहीं 2॥

राम भ...

119- हिया के अंधे फिर चौरासी....

हिया के अंधे फिर चौरासी छाई ॥ टेक ।

कभी जनम हो कभी मरैगा
जून जून में दुःख भरैगा
किसकै सिर तूं दोष धरैगा
तैनेई न्योत बुलाई 1॥

दारुण दुख सहे तुझे ना बेरा
पड़ी भूल छा गया अंधेरा
नरकों से छुटै पीछा तेरा
ऐसी ना करी तै...

120- म्हारी सुरता हे रंगीली.....

म्हारी सुरता हे रंगीली दासी सतगुरू की हो ले ॥ टेक ।

सम दम आसन श्रद्धा सीखो समाधाम उपराम
छटी तिथि का सा साधन समझो भजन करो निष्काम
नाम रटले सारंगपाणी राही बेहद की टो ले 1॥

आतप टीप क्षुधा तृषा से सहन करो सुभाव
ब्रह्मलो...

121- भजन करे तै इंसान का....

भजन करे तै इंसान का
परलोक बना रहता है ॥ टेक ।


काम क्रोध मद लोभ नै तजकै
शील दया पै बैठ जा सजकै
प्रेम का प्याला पी ज़्या रजकै
यो संकट कटै जहान का
जब एक जना रहता है 1॥

मोह ममता से दूर रहे जा
भक्ति में भरपूर रहे जा
सदा ...

122- तेरी दूर नगरी....

तेरी दूर नगरी,
कैसे आऊं हो कन्हैया ॥ टेक ।


रात को आऊं कान्हा डर मोहे लागे
दिन में आऊं तो मोहन देखे सगरी
दूर नगरी तेरी दूर नगरी 1॥

सखी संग आऊं कान्हा लाज मोहे आए
एकली आऊं तो मोहन भूलूं डगरी
दूर नगरी तेरी दूर नगरी 2॥
<...

123- हरि के भजन बिन जिंदगी.....

हरि के भजन बिन जिंदगी बिरथा गई
गई सो गई बीर अब राख ले रही
हरि के भजन बिन ... ॥ टेक ।


ॐ नाम की करे बिन भक्ति
ये किसी को नहीं मिलती मुक्ति
जिसकी सुरती भजन में फिदा ना रही
गई सो गई बंदे ..... 1॥

एक राजा बेन भक्ति सैं टल्या था