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पंडित चिम्मन लाल जी 'रत्नकुमार पार्वती कथा'

ख्याल

दिल्ली शहर में जहांगीरमल नाम का पहले लाला था
सूरजमल भी बणिक पुत्र एक शहर कोटले वाला था

सूरजमल सुत रतन कुमार बना जो भाग विशाला था
जहांगीरमल की पुत्री पार्वती बनी जो रूप निराला था

रतन कुमार पार्वती का संबंध दोनों सेठों नै पाला था
गुरु महोर सिंह कहै मिटै नहीं जो अंकुर विधि नै डाला था

छूट गये महल हवेली हाट
पड़ा सूरजमल कै टोटा ॥ टेक ।

टोटा खोटा ऊत जूत मरवा दे भूपाल कै
पैसा ऐसा साथ दे रहा सेरा बंधवा दे स्याल कै
टोटे का चपेट लाग्या सेठ माला माल कै
भावी नै खिलाया खेल बैठी घासा घाल कै
नीलाम हुये सब ठाठ
रहया ना जल पीवन नै लोटा 1॥

टोटे का सताया आया सेठ काल चक्कर में
रतन कुमार सेठानी कै हो ग्या चाल चक्कर में
मांगैं सदावृत गुजारा करैं धर्मशाल चक्कर में
दान करनिये फिरैं मांगते बन कंगाल चक्कर में
सब बिगड़े ओघट घाट
कर्म बस दुख सुख जा ओटा 2॥

जहांगीरमल नै पुत्री पार्वती स्यानी देख
शुद्ध शाहा बनवाया सनातन चाल पुरानी देख
घर के अंदर राय की सेठ ओर सेठानी देख
कोटले पठाया नाई पुत्री की जवानी देख
बदन में हो जाता ओचाट
जमा हो जब योवन का कोटा 3॥

ब्याह की चिट्ठी देकै नाई को खंदाया जी
नेग की खुशी में नेवगी फूला नहीं समाया जी
कोटले शहर में पता सूरजमल का लाया जी
एक धर्मशाला में सेठानी ओर रतन कुमार पाया जी
चिम्मन लिये बुहार अगम की बाट
बजैगा यम घर में जा सोटा 4॥

टोटे में बेहाल नेवगी कोई नहीं बुझण आला
न्यू बोल्या सेठाणी ब्याह का मतना करीये टाला ॥ टेक ।

पैसे बिन कैसे ब्याह रचाऊं ना भाई बंद तमाम
दसा टलै ना सेठाणी चाहे बेसक कर बदनाम
पीहर में भी मांगे सेती मिलती नहीं छदाम
भाग लिखा हो सै सेठानी पहूंचै बख्त पै राम
राम रुठ जा समय बिगड़ जा फिर भी राम रुखाला 1॥

ब्याह के खर्च डबल हों सैं मैं दाने दाने की मोहताज
बख़्त टलै नहीं सेठानी जब चढ़े बदन कै ऊपर गाज
जन्म हुया जब रतनकुमार का नोबत रही थी बाज़
ईश्वर फेर बनावैगें सेठानी सकल समाज
ईब तो ब्याह का करना लागै जैसे पहाड़ हिमाला 2॥

नाई नै तो बहुत कही पर सेठानी कर गई इंकार
टोटे जालिम न दुनिया में बड़े बड़े कर दिए लाचार
दिल्ली आकै नाई नै दिये जहांगीरमल को समाचार
सुन लाला नै धोखा खाया सुखदुख कर्मों के अनुसार
समधी मर गया समय बिगड़ गया भावी नै घर घाला 3॥

शहर कानपुर सेठ का लड़का नाम था जिसका मोतीलाल
ब्याह सगाई की चिट्ठी लिख नाई अपना दिया घाल
मोतीलाल संग ब्याह करैं यो पार्वती न सुन लिया हाल
वीरआर्य लड़की सुनकै चिम्मन करण लगी कुलाल
मात पिता मेरे डूब गये जा कैसे वेद धर्म पाला 4॥

मेरे वेद धर्म का घात
करने लागे तात मात
हाय राम हाय राम नैया है तुम्हारे हाथ ॥ टेक ।

पार्वती की माता आई सुन कै आरत बैन
हे बेटी तू क्यूं रोई न्यू जल भर भर कै नैन
बेचैन हो कहन लगी सुता बात
ब्याह रचाया मोती साथ
हाय राम हाय राम मरियो जग में ऐसे तात 1॥

मोतीलाल मौत मेरी रतन कुमार प्राणधार
मोती संग ना ब्याह कराऊं पिता कहो चाहे सौ बार
उबार धर्म मेरा दीनानाथ
बाबल तो हो गया किरात
हाय राम हाय राम कैसी बुरी लागी स्यात 2॥

मेरे पिता नै करी सगाई पति बताया रतन कुमार
वाक दान कर दिया पिता नै अब मोती संग किया विचार
माँ नरनार दिनरात
करैं चर्चा छत्तीसों जात
हाय राम हाय राम कैसा हुआ उत्पात 3॥

पृथ्वी मात दराड़ खा ज्या मुझ दुखिया नै लिये समाय
धर्म छूटने सै दुनिया में वृथा जन्म अगारथ जाय
पाय चिम्मन खबरात
आया पार्वती का तात
हाय राम हाय राम क्यों ना धरणी दराड़ खात 4॥

पार्वती स्याणी होकै क्यूं याणी याणी बात करै
पिता यानी बात में कसर नहीं क्यूं ब्याह मोती कै साथ करै ॥ टेक ।

मोती लाल खान मोती की टोटे के मांह रतनकुमार
सरविख सदपुरुष वचन पिता तीनों फलते एक ही बार
सती पति करै एक बार पिता मतना धर्म का घात करै
टोटा खोटा ऊत जगत में बड़े बड़े उत्पात करै 1॥

भिखमंगे की गैल में दारुण दुख भरने होंगे बेटी
कर्मों में मेरै हुई पिता तो फिर भर ज्या धन की पेटी
हेठी किस्मत पार्वती म्हारी क्यूं ओछी जात करै
जात पात का ख्याल नहीं जो पतिव्रत धर्म विखात करै 2॥

भिखमंगे की गैल मैं कर दूं पैसे तक ना दूंगा दान
पिता तेरे दान की नहीं ज़रूरत मेरा हुया सनातन ध्यान
कहना मान ले पार्वती तेरी माता आत्मघात करै
माता हो जन्म देन के नहीं कर्मों का साथ करै 3॥

निर्बुद्धि हो गई पुत्री यो जहांगीरमल नै किया विचार
ब्याह की चिट्ठी लिखण लाग गे जुड़ मिल आ गये साहूकार
पार्वती हरबार चिंता में भष्म अपना गात करै
चिम्मन चिंता बहुत बुरी बंदे का बुरा हालात करै 4॥

दोहा

रतन कुमार धर्मशाल में, सोवै था पैर पसार ।
सुपने में बोली पार्वती, धोक चरणों में मार ॥

पिया जी मैं थारे हो चरण की दासी ॥ टेक ।

पिता नेम सै हार लिया है
बर मोती अखत्यार लिया है
मनै थारा आधार लिया है
नित दर्शन की प्यासी 1॥

कृष्ण ज्यूं पिया दर्श दिखाईयो
रुकमण ज्यूं मनै ब्याह ले ज्याईयो
राजसिंह ज्यूं जल्दी आईयो
ना तो मर ज्यागी चंद्रकला सी 2॥

नहीं आये तो बलिदान मैं कर ज्यां
आत्मघात कर प्राणी हर ज्यां
चूस कणी हीरे की मर ज्यां
लागैगी देर जरा सी 3॥

सांगीत:
त्यागा सुपना हुई कल्पना अपना आपा समझाया
है रूप अती मानो काम रती पार्वती में सदगुण पाया
जब बोल्या मात मैं दिल्ली जात सुपने का हालात सब बतलाया
पार्वती है नार सती यह शुद्ध मती सुपना आया

झट पट करकै चाल पड़ा था सूरजमल का रतन कुमार
टोटा खोटा मोटा दुख हो सजनो कर देता लाचार
सुपने का हाल कर ख्याल चाल पड़ा कभी भागता बेसुम्मार
पहूंचा ऊंचा कूंचा गली देखा कानपुर का बाज़ार
एक सदावृत पर आया ध्याया पाया बैठा साहूकार

देख शान, हो गया हैरान, पहचान करै सूरजमल की
सूरज का लाल, हो गया ख्याल, दयाल निगाह करै शक्ल की
कोई विपत पड़ी, है बुरी घड़ी, कर्मरेख अड़ी जैसे नल की
लिया पकड़ हाथ, ले आया साथ, जा पूछी बात सब हलचल की सब हाल कह्या, जल नैन बह्या, जहां करै सेठ इमदाद दिल की

मित्र पुत्र मतना घबराइये
मन मानी माया ले जाइये
जरूरत पडै तो फेर आ जाइये
गाइये चिम्मन अविनाशी 4॥

दोहा

सेठ दुखी हुया सुनकै, रतन की लाचारी नै ।
दस हजार अशर्फी दई, एक ऊंट सवारी नै ॥

लई अशर्फी दस हजार
ऊंट पै हो कै सवार
दिल्ली शहर को चाल पड़ा
सूरजमल का रतन कुमार ॥ टेक ।

सुपना याद कंवर कै आता
करहे कै झट चाबुक लाता
जाता मार्ग के मंझार
सांडिया पवन रफ्तार
दिल्ली शहर ख्याल पड़ा
भानु अस्त हुया जिस बार 1॥

कह सुपना था समय आई का
कब सी वख्त मिलै भलाई का
नाई का जा ढूंढा द्वार
नाण से बोला वचन उचार
कानों में जब फाल पड़या
देखै नाण नजर पसार 2॥

चंद्रमा सी देख शान
नाण होय गई हैरान
बयान कर मत लावै बार
क्या है तेरा सोच विचार
मेरी नजर में ये हाल पड़ा
मार्ग बीच गया तू हार 3॥

शहर कोटले से आया
सुत सूरजमल का कहलाया
बुलाया पार्वती कर प्यार
पिता जहांगीर साहूकार
शरण में चिम्मन लाल पड़ा
सतगुरुजी मनै लियो उबार 4॥

घणी दूर सैं आया री नाण
चढ़ रही सै मेरै हार
आज रात नै डट लेण दे ॥ टेक ।

उस पार्वती प्राण प्यारी नै
जाकै कह हालत म्हारी नै
पतिव्रता नारी नै जाण
लाइये मतना बार
आये का बेरा पट लेण दे 1॥

अशर्फी दई पंद्रह इनाम की
निगाह करनी हो म्हारे काम की
प्यारी बाम की प्रीत प्राण
है तेरै अख्तयार
बख़्त यो कष्ट का कट लेण दे 2॥

पैसा फांसी से उतार दे
बिगड़े से बिगड़ा काम बना दे
ला दे जब वो राम रसाण
कर लेते सब प्यार
प्यारी हित माया बट लेण दे 3॥

दे विश्राम फिर वचन उचारे
भगवन सिद्ध काम करैं थारे
प्यारे राम नाम का गाण
काम क्रोध अहंकार
से अलग हो चिम्मन रट लेण दे 4॥

दोहा

जहांगीर माल के महल में, पहुंची नाण जाय ।
शेर कह पार्वती, जल्दी दई समझाय ॥

पार्वती तेरे भरतार की
चंद्रमा सी शान
शहर दिल्ली में आ रह्या हे ॥ टेक ।

प्रीत घणी जैसे चंद चकोर
माया ले रहा अशर्फी मोहोर
और घणी दिलदार की
करैगी तू ही पहचान
बास घर म्हारै पा रह्या हे 1।

प्यारी कोयल कैसी बोल
वो तै हीरा सै अनमोल
सितोल वैदिक प्यार की
जैसा तेरा ध्यान
भान सा रूप अति छा रहया हे 2॥

हे अपने पिता का बोल
पूरा करना होगा कोल
रोल तेरी तकरार की
दिल्ली के दरम्यान
नार नर सब बतला रह्या हे 3॥

जंगम:
सुन कै बयान, बोली बखान, अरी नाण, शौच को जाऊंगी
कहा पिता बोल, करूं पूरा कोल, मत मचा रोल, जब आऊंगी
है चतुर प्रवीण, दिल में यकीन, ले पासा तीन, मैं ध्याउंगी
यह सोच चली, जहांगीर लली, देहली की गली, नहीं आऊंगी
प्रीतम का प्यार, दिल में अपार, कह नाण द्वार, कब बिछाउंगी
हो रह्या ख्याल, जल्दी से चाल, सूरज का लाल, कब पाऊंगी

मार्ग दरम्यान, देह थी हैरान, सोया चादर तान, कै रतन कुमार
कर्मरेख अड़ी, नाण घर में बड़ी, ओर नजर पड़ी, पिया पै जिस बार
गहे चरण, लागी उचरण, पिया जागो प्रण, थारा हो गया पार नहीं हुया होश, कुछ समझ दोष, होकै खामोश, बैठी चुपमार
देखा सूता पति, सो गई सती, कर्मों की गति, है बेसुम्मार
एक आया चोर, देख्या करकै गौर, भरी अशर्फी मोहोर, हो लिया सवार

खुड़का सुनकै निद्रा त्यागी
जाता ऊंट देखकै उचरन लागी
लुभागी बोली नार की
करया चिम्मन बंद पयान
ऊंट अपना ठहरा रह्या हे 4॥

ठहरो पति ठहरो पति कहती नींद में चाली
सती चली महकार ज्यूं खुशबू सींद में चाली ॥ टेक ।

डाकू नै ऊंट लिया ठहराय
पार्वती ऊपर लई बैठाय
मन ही मन हरसाय
खुशी ज्यूं बींद में चाली 1॥

न्यू बोल्या तू किसकी जाई
आज मनै कर्मा करकै पाई
फिर दिल्ली आवन द्यूं नाई
तू रियासत जींद में चाली 2॥

सुन पार्वती घबराई
भगवन अच्छी दई करड़ाई
बोली न्यू बतलाई
भूख बगींद में चाली 3॥

भूख से व्याकुल हुया मेरा तन
कहीं से लाइयो जाकै भोजन
जब चेतै जब चिम्मन
उम्र उनींद में चाली 4॥

दोहा

डाकू भोजन को गया, पार्वती दई उतार ।
करहे को दौड़ाय कर, पहूंचा बीच बजार ॥

पार्वती कर आँख मिंचाई
जा बड़गी बणखंड के मांही
डाकू आया लेकै मिठाई
खाने वाली पाई ना ॥ टेक ।

इधर उधर पार्वती को करी डाकू नै तलाश जी
छूटी आश हुया निराश चल्या मारता श्वास जी
आकाश में छाया अंधकार
वर्षा बरशै बेसुमार
पार्वती कर रही बिचार
समय थ्याहने वाली थ्याही ना 1॥

एक वृक्ष कै तलै बैठकै कुचरन लागी धरणी
एक माया का मिल्या खजाना हुई ईश्वर की करनी
बरनी जो ललाट में
होती वही वाद घाट में
गई पियाजी पाट में
खुशी आने वाली आई ना 2॥

जहांगीरमल की बेटी नै भेष जिनाना दिया उतार
आर्यवीर लड़की नै रूप मर्द का लिया धार
मंझार बियाबान चाली
करती न्यू बखान चाली
पति चरण कर ध्यान चाली
घड़ी पाने वाली पाई ना 3॥

आगै बैठे पार्वती को डाकू मिले चालीस
सज धजकै एसे हो रही जैसे पूरे घर का रईस
फीस तनखा थारी बंधवाऊं
बादशाह कै नौकर लगवाऊं
चिम्मन दस नंबरी कटवाऊं
छवि गाने वाली गाई ना 4॥

दोहा

पार्वती कहने लगी, मैं दिल्ली का वजीर ।
सरकारी नौकर करूं, हटै दस नंबरी तक़सीर ॥

माया का लिया काढ़ खजाना
दे दिया हुक्म वजीर
चलो शहर कोटलै चालाँगे ॥ टेक ।

करैंगे रियासत की पड़ताल
कौन शाह कौन कंगाल
संभाल करके होगा आना
कौन गरीब अमीर
राजधर्म नै पालांगे 1॥

करैंगे दस नंबरी आज़ाद
रागी बागी हो रहे बर्बाद
मर्याद शाह का हुक्म जाना
जो कानून लकीर
वो सब देखैं भालांगे 2॥

खूफिया रूप से करैं घुमाई
किसी को बेरा पटने दें नाहीं
राही में हुया हुक्म सुनाना
करकै खत्म तहरीर
डेरा कोटले डालांगे 3॥

जंगम:
कर सफर कोटले शहर में पहूंची जहांगीरमल की राज कुमारी
उसी धर्मशाला में डेरा किया जहां रतन कुमार की थी महतारी
कहने लगी मैं वजीर दिल्ली का सूरजमल से थी यारी
जिक्र सुना था जहांगीरमल घर चर्चा हो रही थी थारी
टोटे के बीच में मरा सेठ थारी बिगड़ गई साहूकारी
मित्र प्रण निभाने आया माया संग लाया भारी
कर दी सेठानी मालोमाल फिर चलने की करी तैयारी
अपने बेटे नै मत ब्याहिये जब तक ना खबर आवै म्हारी

संसारी से गुरु पार लंघाना
थारा चिम्मन दास अधीर
गुरु ज्ञान का दीपक बालांगे 4॥

शहर कोटला छोड़ चली वा जहांगीरमल की बेटी
एक जंगल में ठहरी भरी अक्ल की बेटी ॥ टेक ।

खान पान विश्राम दिया और डाकुओं को हुक्म सुनाया
तुम सारे आराम करो मैं चाहूं पहरा लाया
किसी अक्ल से धर्म बचाया थी वेद नस्ल की बेटी 1॥

हुक्म मानकर वजीर साहब का डाकू सोये पैर पसार
कागज पिलसन उठा हाथ में लिखने लागी सब समाचार
लिख दिया था मजबून सुधार थी विपत हलचल की बेटी 2॥

मैं बनिए की बेटी सूं दिल्ली शहर हमारा
अपने पति का गई बनावन बिगड़ा साहूकारा
जिसने अपना धर्म पियारा वो सही असल की बेटी 3॥

हिन्दू को लिख दई नमस्ते मुस्लिम को सलाम मेरा
चिम्मन लाल सहयोग आपका पूर्ण हो गया काम मेरा
यो ही था पैगाम मेरा थी धर्म अटल की बेटी 4॥