धन्ना के सत्कार सैं, हुई द्विज कै ख़ुशी अपार ।
धन्यवाद देने लगा, रह्या आशिखा उचार ॥
टेक – 2
सभ दुनिया का कल्यान
तू करता है मजदूर किसान
धन्य तेरा क्या कहना ॥ टेक ।
अन्न ब्रह्म पैदा करता है कर करकै मजदूरी तू
जलचर भूचर नभचर की भूख करै है पूरी तू
रजा रंक धनवान
कमाई खाते तेरी विद्वान
धन्य तेरा क्या कहना 1॥
लख चौरासी जीवाजून का त्रिगुणरूप पालनहारा
कीड़ी को कण हाथी को मण खुल्या अलख का भंडारा
प्यारा रूप महान
कर कमलो से दे रह्या दान
धन्य तेरा क्या कहना 2॥
शुरू काम के करने में पूर्ण रटना भगवान की
सुन टेर मेहेर करते विनती करुणा भरी जबान की
किसान की प्यारी बखान
करते वर्षा भगवान
धन्य तेरा क्या कहना 3॥
इतनी कह ब्राह्मण पूजा करने लग्या सालग्राम की
धन्ना नै ब्राह्मण घर पूजा देखी श्री घनश्याम की
काम की मनुवा बेईमान
कर गये महोर सिंह गिल्यान
धन्य तेरा क्या कहना 4॥