क्या जवाब दे सरकार में, पड़ा भ्रम बुर्ज में सोवै ॥
भ्रम बुर्ज में सेज बिछाई
गाफिल हो तुझे निंद्रा आई
लाखों जन्म की खोई कमाई
ममता के बाजार में, फिर जमा देख क्यू रोवै 1॥
दुरमत दूती फिरै अमानी
संग लिए दुविधा पटरानी
शील संतोष दया नहीं ठानी
लग्या कुबद्ध की कार मैं, क्यूँ विष के बिरवे बोवै 2॥
आवै जनरेली परवाना
होगा कूच पल भर में जाना
पकड़ मंगा ले यम का थाना
ले ज्या छोड़ै दरबार में, जद जी को मुश्किल होवै 3॥
चेत चेत नर मूर्ख अंधे
भजन करो कट ज्यां यम फंदे
रतिराम सतगुरु के बंदे
ज्ञान गंग की धार में, जहां सुरता धोबट धोवै 4॥