(तर्ज – बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम)
बाबा महोर सिंह जी को सादर नमन
कृपा बनाये रखना हर एक छन ॥ टेक ।
थारी याद दिल में संजोए हुए
ख्वाबों खयालों में खोए हुए
बैठी ये संगत दीजै दिव्य दर्शन 1॥
श्रद्धाभाव संग ये पर्व मनाया है
मेला हरवर्ष लगे यही मनभाया है
गुणगान कर रहे सेवकगण 2॥
भक्तजन बाबा थारी महिमा सुनावैं
सत्संग रूपी गंग में गोता लगावैं
भागधारी है इनका निर्मल मन 3॥
सांगीत
ज्ञानी ज्ञाता आप सम सुना और कोई नांय
बाबा रतिरामजी का परचम दिया लहराय
दंगल शास्त्रार्थ जीते शिरोमणि पद पाय
ज्योतिष विद्या आपके याद थी भरपूर
व्याकरण शास्त्र का ज्ञान जो लिया जरूर
साहित्य और संस्कृत भाषा में हुए मशहूर
संत महात्माओं नै भी गुरु अपनाये आप
आमजन को जीवन का सहूर सिखाये आप
भक्तिरस, वीररस क्या ग्यारों रस गाये आप
संगीत कला मर्मज्ञ और काव्य के भंडार आप
शब्दों के पारखी और ज्ञान के हो सार आप
राजेश कोई कवि नही, बस एक आधार आप
थारी ऋचाओं का अभ्यास हम करते
अचल सुख के दाता का नाम सुमरते
थारी ही किरपा से ये खिला है चमन 4॥