दोहा –
मच्छ कहै बल्लभ बली तै जीत्या संग्राम ।
मैं तेरै अर्पण किया राजपाट धनधाम ॥
लिया पकड़ सुशर्मा सेना भाग चली ॥ टेक ।
चली सेना भाग, रण खेत त्याग, गये रस्तै लाग, पुर को ध्याये
गया विकट टूट, गई धैन छूट, गऊओं की लूट, का फल पाये
गऊओं कै हेत, लाखों बानेत, रह गये खेत, धोखा खाये
खपे गज हजार, ताजी सवार, सिर मार मार, कर पछताये
नहीं हुया धेय, अपयश को लेय, राजा को देय, कर हर्षाये
अनहूणी हूणे की नाहीं हूणी तो नाह्य टली 1॥