कहै पति से सती गति पुत्र बिन बालम हो नहीं ॥ टेक ।
पुत्र बिन गति नहीं यही मन बसी
पिया माया ना काम है किसी
पुत्र बिना कुलकला पिया इसी
जिसी तो शशि बिन रजनी भही 1॥
मणी बिना सूना सर्प मणधारी
पति बिन होती सूनी नारी
पुत्र बिन सूनी महल अटारी
थारी सारी बालम हो रही 2॥
वेद शास्त्र रहे बतलाय जी
पुत्र बिना मुक्ति है नांय जी
दूजा करवाल्यो ब्याह्य जी
पियाजी राजी हो मनै कही 3॥
पिया पुत्र जन्म जा एक
गती हो कटते पाप अनेक
महोर सिंह कहै कर्म की रेख
लेख ल्यो देख होकै रहती सही 4॥